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Showing posts from January, 2019

महाराणा सांगा जब चितोड़ के शाशक

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मंझला कद , मोटा चेहरा , गेहुआ रंग और बड़ी बड़ी आँखो वाले महाराणा सांगा भारत की धरती के  वे वीर पुत्र है , जिन्होंने मध्यकाल के उस खुनी दौर में अपने सीने पर तोप  के गोले ले लिए थे। महाराणा  २४ मई १५०९ ईस्वी को महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ के  सिंहासन  पर विराजमान हुए।  इन्हें ही इतिहास में महाराणा सांगा के नाम से जाना जाता है।  महाराणा सांगा के काल में मेवाड़ की सैनिक शक्ति अपने चरम पर पहुँच गयी थी , उनकी सेना में एक लाख सैनिक तथा ५०० हाथी थे।  ७ बड़े राजा , ९ राव और १०८ रावत महाराणा सांगा के अधीन थे। बाबर का सामना करने से पूर्व १०८ बड़ी लड़ाईया उन्होंने मालवा के सुल्तानों से लड़ी थी , और सभी जीती।  राणा सांगा के आगे कोई दूसरा राजा कान हिलाता ना था।  जोधपुर तथा आमेर के राजा महाराणा सांगा का पूरा सम्मान करते थे , ग्वालियर , अजमेर , सीकरी  , रायसेन , कालपी , चंदेरी , बूंदी , गगनौर , रामपुरा तथा आबू जैसे शक्तिशाली प्रदेश उनके सामंत हुआ करते थे। महाराणा सांगा जब  चितोड़ के शाशक बने थे , उस समय उनका राज्य चारो और से शत्रुओ से ही घ...

Vishakha chauhan

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राजा अजीतसिंह द्वारा प्रदत्त स्वामी विवेकानन्द नाम से ही

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स्वामी विवेकानन्द जी की सफलता में  खेतड़ी नरेश अजित सिंह जी का  था महान योगदान----- स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती (12जनवरी)पर विशेष देशी रियासतों के विलीनीकरण से पूर्व राजस्थान के शेखावाटी अंचल में स्थित खेतड़ी एक छोटी किन्तु सुविकसित रियासत थी, जहां के सभी राजा साहित्य एवं कला पारखी व संस्कृति के प्रति आस्थावान थे। वे शिक्षा के विकास व विभिन्न क्षेत्रों को प्रकाशमान करने की दिशा में सदैव सचेष्ट रहते थे। खेतड़ी सदैव से ही महान विभूतियों की कार्यस्थली के रूप में जानी जाती रही है। चारों तरफ फैले खेतड़ी के यश की चर्चा सुनकर ही विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजऩवी ने अपने भारत पर किए गए सत्रह आक्रमणों में से एक आक्रमण खेतड़ी पर भी किया था, मगर उसके उपरान्त भी खेतड़ी की शान में कोई कमी नहीं आयी थी। खेतड़ी नरेश राजा अजीतसिंह एक धार्मिक व आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले शासक थे। राजा अजीतसिंह ने माऊन्ट आबू में एक नया महल खरीदा था जिसे उन्होंने खेतड़ी महल नाम दिया था। गर्मी में राजा उसी महल में ठहरे हुये थे उसी दौरान 4 जून 1891 को उनकी युवा संन्यासी विवेकानन्द से पहली बार मुलाकात हुई। इस म...

साहब बहुत भेदभाव हुआ दलितों के साथ।

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अजी साहब बहुत भेदभाव हुआ दलितों के साथ।उनसे खेतों में काम कराया गया।हरवाही कराई गई।गोबर उठवाया गया।उन्हें शिक्षा से वंचित रखा गया। साब बहुत जुल्म हुआ दलितों पे ..! यह बात बहुत जोरों से सोशल मीडिया,मास मीडिया के माध्मय से में लोगो को बताई जा रही है। मगर 1400 साल पहले जब मक्का से इंसानी खून की प्यासी इस्लाम की तलवार लपलपाते हुए निकली तो ... एक झटके में ही...ईरान,इराक,सीरिया,मिश्र,दमिश्,अफगानिस्तान, कतर, बलूचिस्तान से ले के मंगोलिया और रूस तक ध्वस्त होते चले गए। स्थानीय धर्मों परम्पराओं का तलवार के बल पर  लोप कर दिया गया और सर्वत्र इस्लाम ही इस्लाम हो गया। शान से इस्लाम का झंडा आसमान चूमता हुआ अफगानिस्तान होते हुए सिंध के रास्ते हिंदुस्तान पहुंचा। पर यहां पहुंचते ही इस्लाम की लगाम आगे बढ़ के क्षत्रियों ने थाम ली जिसके कारण भीषण रक्तपात हुआ। आठ सौ साल तक क्षत्रिय राजवंशों से ले के आम क्षत्रियों ने इस्लाम की नकेल ढीली न पड़ने दी।इनका साथ भी दिया जाटों ने,गुज्जरों ने, यादवों ने, ब्राह्मणों ने वैश्यों ने ..! पर ये लोग फ्रंट लाइनर नही रहे कभी।सिर्फ आत्मरक्षार्थ डटे रह...
लत्ता अस कलकत्ता हालय, लंदन बैठि लाट थर्राय॥ राजपूत ना रहने देगें, कल के सबको देंय भगाय।। जब दल उमड़य उमरगढ़ का थरथर कापय मोहम्मदाबाद। सुनसुन बातैं खुफिया जन की,भगैं फिरंगी ले मरजाद।।  यह लोकगीत उस अमर शहीद की याद दिलाता हे जिसने देश की आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। उस वीर का नाम था राजा दिग्विजय सिंह जिसने लखनऊ का नाम इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। राजा दिग्विजय सिंह जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से लोहा लिया था। उमरगढ़ के राजा दिग्विजय सिंह ने मडिय़ांव इलाके में छावनी सैनिकों का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजायी तथा उन्हें आगे बढऩे से रोक दिया मजबूरन अंग्रेजों को रेजीडेंसी में शरण लेनी पड़ी थी। राजधानी के महोना ताल्लुक स्थित उमरिया गांव(उमरगढ़) किले में राजा दिग्विजय सिंह रहा करते थे। गांव के लोग आज भी लोकगीतों के माध्यम से उन्हें याद करते हैं। राजा दिग्विजय सिंह पर चलाए गए मुकदमें बताते हैं कि किस प्रकार उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया और मडिय़ांव व चिनहट इलाके में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को हिन्दुस्तानी ...

कैसा पराक्रमी वीर उत्तर भड़ किवाड़ भाटी (रावल भोजदेव)

अद्भुत योद्धा रावल भोजदेव ।। ( रावल विजयराज लांझा के पुत्र व राहड़ जी के बड़े भाई) काक नदी की पतली धारा किनारों से विरक्त सी होकर धीरे धीरे सरक रही थी, आसमान ऊपर चुपचाप पहरा दे रहा था और नीचे लुद्रवा देश की धरती, जिसे उत्तर भड़ किवाड़ भाटी आजकल जैसलमेर कहा जाता है । प्रभात काल में खूंटी तानकर सो रही थी, नदी के किनारे से कुछ दूरी पर लुद्रवे का प्राचीन दुर्ग गुमसुम सा खड़ा रावल देवराज का नाम स्मरण कर रहा था | ‘कैसा पराक्रमी वीर था ! अकेला होकर जिसने बाप का बैर लिया | पंवारों की धार पर आक्रमण कर आया और यहाँ युक्ति, साहस और शौर्य से मुझ पर भी अधिकार कर लिया | साहसी अकेला भी हुआ तो क्या हुआ ? हाँ ! अकेला भी अथक परिश्रम,ज्ञासाहस और सत्य निष्ठा से संसार को अपने वश में कर लेता है ….| उसका विचार -प्रवाह टूट गया, वृद्ध राजमाता रावल भोजदेव को पूछ रही है ‘ बेटा गजनी के बादशाह की फौजे अब कितनी दूर होंगी ?’ ‘ यहाँ से कोस भर दूर मेढ़ों के माल में |’ ‘ और तू चुपचाप बैठा है ?’ ‘ तो क्या करूँ ? मैंने बादशाह को वायदा किया कि उसके आक्रमण की खबर आबू नहीं पहुंचाउंगा और बदले में बादशाह ने भी वायदा किया...

वर्तमान भारतीय राजनीति के लौहपुरुष गृहमंत्री राजनाथ सिंह . आइये जाने कैसे

आज कल भारतीय समाज मे एक नया ट्रेंड चला है खासकर सोशल मीडिया पर . ज्यादातर लोगों को सच्चाई और तथ्यों से कोई मतलब नही होता है बस गन्दी राजनीति या असमाजिक तत्वों द्वारा चलाये अभियान में अपना योगदान देना शुरू कर देते हैं. ऐसा ही माहौल पिछले कुछ साल से देश के एक बरिष्ठ नेता के खिलाफ देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर लोग विना तर्क के एक शान्त स्वभाव और गंम्भीर पद्ति से जीवन जीने वाले नेता राजनाथ सिंह पर तंज कसते नज़र आते है. कुछ मूर्ख या पार्टी भक्त उनके नाम तक को विगाड़कर राजनाथ सिंह की जगह निंदानाथ तक कहते दिखे हैं. तो कुछ लोग जो कई तथ्यों को देखकर और राजनाथ सिंह के जीबन के आधार पर उन्हें लौहपुरुष भी कहते दिखे . पर आज हम तथ्यों के जरिये देखते हैं कि असल जीवन मे राजनाथ सिंह हैं कौन ? निंदानाथ या लौहपुरुष  . इस बात को मैंने भी समझने की कोशिश की राजनीति में सबसे बड़ी बात की आज लगभग हर छोटे बड़े नेता पर कई आरोप लगते रहते हैं चाहें वो भ्र्ष्टाचार का आरोप हो या कुछ और पर राजनाथ सिंह पर उनके इतने विशाल राजनैतिक जीवन मे एक भी दाग नही लगा है. छोटे से बिधायक पद से लेकर देश के गृहमंत्री के पद त...

सोन चिड़िया' का ट्रेलर हुआ रिलीज, पुलिस के अलावा आपस में भी भिड़ रहे डकैत

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अभिषेक चौबे की नई फिल्म 'सोन चिड़िया' का फर्स्ट लुक ठीक एक साल पहले जारी किया गया था, अब इसका ट्रेलर आया है। फिल्म की रिलीज डेट भी तय हो गई है, ठीक महीने भर बाद यानी 8 फरवरी को यह सिनेमाघरों में होगी। ट्रेलर में यह फिल्म 1970 के दशक की बात करती है। चंबल के डाकुओं की यह कहानी है, जिसमें पुलिस तो है ही, आपसी दुश्मनी भी है। रणवीर शौरी इसमें चौंकाते हैं। भूमि पेडनेकर भी प्रभावित करती हैं। इसके फर्स्ट लुक में तो सुशांत सिंह राजपूत पूरे डाकू नजर आ रहे थे। ट्रेलर में उनका अंदाज अलग ही है। अभिषेक चौबे की इस फिल्म में आशुतोष राण और मनोज बाजपेयी भी हैं। इसके नाम की भी अलग कहानी है। ''उड़ता पंजाब' के बाद अब अभिषेक चौबे अपनी अगली फिल्म का नाम भी कुछ हट कर रखना चाह रहे थे। वर्किंग टाइटिल के रूप में 'सोन चिड़िया' रखा गया था, बाद में इसे ही पक्का कर लिया गया। कहानी पूरी तरह देसी होगी जैसी कि अभिषेक की फिल्मों की रहती है। 'उड़ता पंजाब' बनाने वाले अभिषेक की पहली फिल्म 'इश्किया' का शीर्षक भी बाकी फिल्मों से अलग था। इससे यह बात साबित हो सकती है कि अभिषेक अलग...

The Accidental Prime Minister का रास्ता साफ, अनुपम खेर की फिल्म को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत

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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' (The Accidental Prime Minister) के प्रोमो और फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रभवित लोग ही याचिका दाखिल करने का अधिकार रखते हैं. इसलिए यह जनहित से जुड़ा मामला नहीं है, लिहाज़ा हम इस PIL को खारिज कर रहे हैं. ट्रेलर रिलीज होते ही इस फिल्म पर विवाद जोर पकड़ने लगा. इसमें भाजपा सांसद किरण खेर के प्रसिद्ध अभिनेता पति अनुपम खेर और भाजपा सांसद रहे चर्चित अभिनेता (दिवंगत) विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना ने प्रमुख भूमिका निभाई है. इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य देश को यह बताना है कि वर्ष 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार जाने के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर ली थी. उन दिनों जनता पार्टी के अध्यक्ष और पार्टी के इकलौते सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से अनुरोध कर ऐसा नहीं होने दिया. कांग्रेस को मजबूरी में अर्थशास...

Yash से मिलने गया था फैन, नहीं मिली एंट्री तो गेट से सामने कर लिया सुसाइड

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कन्नड़ सिनेमा (Kannad Cinema) के रॉकिंग स्टार यश (Rocking star Yash) को अब पूरा भारत जानता है. यश की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म KGF ने धमाल मचा रखा है. साउथ इंडिया के साथ-साथ नॉर्थ इंडिया में भी फिल्म को खूब तारीफ मिल रही है और यश की एक्टिंग की प्रशंसा हो रही है. यश का असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है. कन्नड़ सिनेमा में उन्हें यश के नाम से जाना जाता है. KGF की कमाई 200 करोड़ के पास पहुंच चुकी है. कल यश का बर्थडे था. वो 33 साल के हो गए हैं. बर्थडे पर यश घर पर ही थे. ऐसे में फैन्स उनके घर बधाई देने पहुंचे थे. इसी बीच ऐसा हादसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया रवि शंकर अपने दोस्तों के साथ यश को बर्थडे विश करने पहुंचा था. वो होसाकेरेहल्ली स्थित यश के घर पहुंचा. वो यश का बहुत बड़ा फैन था. लेकिन रवि को यश से मिलने नहीं दिया गया. ऐसे में उसने घर के सामने आग लगा ली. लोगों ने आग बुझाई और विक्टोरिया अस्पताल ले जाया गया. कई घंटों तक उसका इलाज चला लेकिन आज सुबह उसने दम तोड़ दिया. ज्यादा जलने के कारण उसको बचाया न जा सका. फिल्म KGF ने हिंदी वर्जन में दूसरे हफ्ते शाहरुख खान की फिल्म 'ज...

कम मात्रा में शराब पीने से बुजुर्ग मरीजों के दिल को खतरा नहीं

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बुजुर्ग लोग जिनकी उम्र 65 साल से ज्यादा है और हाल ही में उन्हें दिल की बीमारी का पता चला हो, वे अपने दिल की चिन्ता किए बिना थोड़ी बहुत शराब पी सकते हैं. एक नए शोध में यह जानकारी दी गई है. इस अध्ययन से पता चलता है कि हरेक हफ्ते सात या इससे कम ड्रिंक पीनेवालों की जिन्दगी ड्रिंक नहीं करनेवालों की तुलना में केवल एक साल बढ़ती है.  शोधकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि इस शोध का मतलब यह नहीं है कि ड्रिंक नहीं करनेवाले दिल की बीमारी का पता लगने के बाद ड्रिंक करना शुरू कर दें.वरिष्ठ लेखक और अमेरिका के वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर एल. ब्राउन ने कहा, "अधिक शराब पीने के खतरों के बारे में हम लंबे समय से जानते हैं कि इससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. जबकि इसके विपरीत हमारे आंकड़ों से पता चलता है कि स्वस्थ लोग थोड़ा बहुत ड्रिंक करते हैं तो उनका ड्रिंक नहीं करने वालों की तुलना में हार्ट फेलियर से लंबे समय तक बचाव होता है." जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित इस शोध में कहा गया गया है कि जिन्हें बुजुर्ग उम्र में हार्ट फेलियर का पता चला है, उन्हें कभी भी ड्रिंक करना ...

सफेद बाल ही नहीं गंजेपन का इलाज

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सालों से भारतीय माज में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जा रहा है, जो हमारी सेहत के लिए उपयोगी होती है। उनमें से एक मेथी भी है, जी हां मेथी का इस्तेमाल हर घर की रसोई में खाने से लेकर सेहत और सुंदरता को सुधारने और बरकरार रखने के लिए किया जाता है। इसलिए अगर मेथी को बहुउद्देशीय मसाला कहा जाएं तो गलत नहीं होगा। तो आइए जानते हैं इसके ऐसे ही कुछ अनोखे फायदों के बारे में... मेथी के आयुर्वेदिक उपाय 1. डायबिटीज़ - मेथी का चूर्ण दूध या गुनगुने पानी से लें। - मेथी का पानी सुबह-शाम पिएं। 2. यौन इच्छा बढ़ाएं - मेथी का चूर्ण दूध के साथ लें। 3. पीरियड्स में दर्द 4. स्वस्थ बालों के लिए

आरक्षण पर मोदी सरकार का साथ देगी 'AAP', यशवंत सिन्हा, राजभर ने करार दिया 'जुमला'

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आरक्षण पर मोदी सरकार का साथ देगी 'AAP', यशवंत सिन्हा, राजभर ने करार दिया 'जुमला' नई दिल्ली: मोदी सरकार ने चुनाव से पहले बड़ा दांव चलते हुए आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. सरकार को इस फैसले पर विरोधी आम आदमी पार्टी का साथ भी मिल गया है. दरअसल, सरकार को यह फैसला लागू करवाने के लिए सविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संवैधानिक संशोधन करना होगा. आम आदमी पार्टी ने इस संशोधन के लिए संसद में सरकार का साथ देने की बात कही है. वहीं यशवंत सिन्हा और ओमप्रकाश राजभर ने इसे सिर्फ एक जुमला करार दिया है. अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे तो हम सरकार का साथ देंगे. नहीं तो साफ़ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है.वहीं यशवंत सिन्हा ने कहा है कि आर्थिक रुप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव एक जुमले से ज्यादा कुछ नहीं है. ये कई तरह की कानूनी जटिलताओं से लैस है और इसे संसद के दोनों सदनों से पास कराने का समय नहीं है. इस कदम से सरकार पूरी तरह एक्सपोज हो गई ह...

आरक्षण 10% नहीं 14% दे

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सवर्णों को आरक्षण 10% नहीं 14% दे मोदी सरकार..बोले गहलोत...कहा मैंने 20 साल पहले केन्द्र को भेजा था प्रस्ताव जयपुर. केन्द्र की मोदी सरकार ने आज पिछडे़ स्वर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर तुरूप का इक्का चल दिया है. आर्थिक रूप से पिछडे़ स्वर्णों को दिये 10 प्रतिशत आरक्षण को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बयान दिया है. गहलोत ने कहा कि ईबीसी आर्थिक रूप से पिछडो़ं को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग उनकी थी. इसके लिए उन्होंने 1998 में ही कैबिनेट का प्रस्ताव दिया था. तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी को रिक्वेस्ट करके भेजा था कि आर्थिक रूप से आरक्षण इन्हें मिले और इसके लिए केन्द्र सरकार संविधान में संशोधन करें. इसके बाद हमारी सरकार चली गयी, लेकिन अब भी वो प्रस्ताव मौजूद था. राजस्थान की पिछली सरकार ने 14 प्रतिशत आरक्षण का बिल विधानसभा में पास किया था. लेकिन आगे कार्यवाही नहीं हो पाई. परंतु अब केन्द्र सरकार ने 14 की जगह 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है. गहलोत ने केन्द्र सरकार से आर्थिक रूप से पिछडों को 10 नहीं 14 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग करते हुए कहा है कि अब भी मैं चाहूगां कि 10 नहीं ...

किसानों से कर्जमाफी के नाम पर ठगी, सामने आया 8.30 करोड़ रुपए का घोटाला

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किसानों से कर्जमाफी के नाम पर ठगी, सामने आया 8.30 करोड़ रुपए का घोटाला डूंगरपुर में किसानों से कर्जमाफी के नाम पर करोड़ों का घोटाला पकड़ा है। यह घोटाला गोवाड़ी, जेठाणा व गामड़ा ब्राह्मणिया की कृषि बहुद्देश्यीय सहकारी समितियों (लार्ज एग्रीकल्चर मल्टीपरपज को-ऑपरेटिव सोसायटी) में सामने आया है।यहां 1719 किसानों के नाम करीब फर्जी तरीके से 8 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने किसानों के सहकारी बैंकों से लिए 50 हजार रु. तक के कर्ज माफी की घोषणा की थी। इसके तहत जिले में कर्ज माफ हुए। फर्जी नाम से उठाए लोन भी माफ हो गए। हंगामे के बाद मामले की जांच शुरू हुई है। पहली कर्ज माफी में ऋण चुकता होने के बाद और अधिक संख्या में फर्जी ऋण जारी किए गए। इनको वर्तमान कर्जमाफी में चुकता करने की साजिश थी। जिन्हें मना किया उनके नाम ले उड़े जिस किसान को ऋण देने से मना किया गया था उसके नाम ऋण जारी हो गया। कुछ किसानों को जो राशि कर्ज में दी गई थी, उसके मुकाबले अधिक राशि जारी हुई। उन्हें मालूम ही नहीं था। जांच के बाद बढ़ेगी घोटाले की राशि रजिस्ट्रार नीरज के. पवन ने लोन सुपरवाइजर को निल...

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण की मंजूरी- सूत्र

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आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण की मंजूरी- सूत्र Add caption सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है. लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने बड़ा दांव खेला है. आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जाति को रिझाने के लिए सरकार ने आरक्षण देने की घोषणा की है. सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है. सूत्रों के मुताबिक इस आरक्षण का फायदा ऐसे लोगों को मिलेगा जिसकी कमाई सलाना 8 लाख से कम है. केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने इस फैसले पर कहा, "यह बहुत अच्छा फैसला है. अब तक सिर्फ बातें होती थीं लेकिन अब इस सरकार ने दिखा दिया है कि वह फैसला लेने में भी सक्षम है. इससे बहुत सारे लोगों को फायदा मिलेगा. इस पर आगे का फैसला कमेटी करेगी."

देश रक्षा में मारवाड़ के राठौड़ों का बलिदान

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                                    स्मरणीय है देश रक्षा में मारवाड़ के राठौड़ों का बलिदान मारवाड़ के इन राठौड़ राजपूत वीरों ने भी सैकड़ों वर्षों तक म्लेच्छ शक्ति से लगातार संघर्ष करते हुए हिन्दुस्तान की पावन पवित्र  देव भूमि की सुरक्षा में संस्तुत्य योगदान दिया था ।महाराष्ट्र और सम्पूर्ण दक्षिण भारत और बाद में कन्नौज पर जिन राष्ट्रकूट राजाओं का शासन था उन्हीं के वंशज इन राठौड राजपूतों ने मरुधरा की सुरक्षा से अपने को उस दिन तक बचाये रखा जिस दिन तक वे स्वयं इसकी सुरक्षा करने योग्य नहीं हो गये । मारवाड़ के प्रतिहार और चौहान शासकों के लगातार मुसलमानी आक्रमणों का सामना करते रहने से जो निर्बलता आई उनकी पूर्ति करने का काम राठौड़ों ने किया था । इस प्रकार कन्नौज के राष्ट्रकूट राजाओं (1043-1068 ई0)के वंशज राव सीहाजी लगभग 1250ई0 में मारवाड़ आये थे ।उस समय 1213 से 1252 ई0 तक मेवाड़ ने तुर्कों को भारी पराजय दी थी ।1248ई0 में बलवन के द्वारा चौहानों पर किये गए आक्रमण में उसे विफलता मिली थी ।1258ई0 में भी रणथ...

गद्दार_नही_धर्मपरायण_और_देशभक्त_राजा_थे_जयचंद

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गद्दार_नही_धर्मपरायण_और_देशभक्त_राजा_थे_जयचंद महाराज जयचंद जी का सही इतिहास एवम् उनकी एक मात्र प्रतिमा। जयचन्द्र (जयचन्द), महाराज विजयचन्द्र के पुत्र थे। ये कन्नौज के राजा थे। जयचन्द का राज्याभिषेक वि.सं. १२२६ आषाढ शुक्ल ६ (ई.स. ११७० जून) को हुआ। राजा जयचन्द पराक्रमी शासक था। उसकी विशाल सैन्य वाहिनी सदैव विचरण करती रहती थी, इसलिए उसे ‘दळ-पंगुळ' भी कहा जाता है। इसका गुणगान पृथ्वीराज रासो में भी हुआ है। राजशेखर सूरि ने अपने प्रबन्ध-कोश में कहा है कि काशीराज जयचन्द्र विजेता था और गंगा-यमुना दोआब तो उसका विशेष रूप से अधिकृत प्रदेश था। नयनचन्द्र ने रम्भामंजरी में जयचन्द को यवनों का नाश करने वाला कहा है। युद्धप्रिय होने के कारण इन्होंने अपनी सैन्य शक्ति ऐसी बढ़ाई की वह अद्वितीय हो गई, जिससे जयचन्द को दळ पंगुळ' की उपाधि से जाना जाने लगा। जब ये युवराज थे तब ही अपने पराक्रम से कालिंजर के चन्देल राजा मदन वर्मा को परास्त किया। राजा बनने के बाद अनेकों विजय प्राप्त की। जयचन्द ने सिन्धु नदी पर मुसलमानों (सुल्तान, गौर) से ऐसा घोर संग्राम किया कि रक्त के प्रवाह से नदी का नील जल एकदम ऐसा...