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Showing posts from May 12, 2018

राजपूत कछवाहा वंश 3

               राजपूत इतिहास  कछवाहा वंश 3 जय कुलदेवी जमुवाय भवानी। धर्मरक्षक राजा मानसिहं आमेर जिनकी चर्चा  दूर दूर तक थी। बल बुध्दि चातुर्य धर्मरक्षक राजामानसिहं, उनके विजय अभियान अफगान, फारस ,मंगोल ,इत्यादि यवन राज्य व श्रीलंका तक थे। उनका भय यवनों में इतना था । इतना कहर भरपाया की आज भी उनके नाम का भय जारी है। वो कोई ओर नही राजा मानसिहं आमेर थे। पर कुछ धर्म विरोधीयों ने इनका वर्तमान में इनका इतिहास इतना धूमिल कर दिया है। जिसकी कोई सिमा नही आज उनके सामने सत्य प्रमाणिक आधार पर साबित करतें है। पर इन झुठों से इस देश से धर्म रक्षकों का सत्य कोई नही छिन सकता हैं। वो सत्य थे।सत्य ही रहेगें।।                       भारमल जी की शादी -पृथ्वीराज सिहं (प्रिथीराज) के पुत्र भारमल जी ने बहुत सी शादीयां की थी। राजपुत वंश की दो ही शादीयां  की है। अतं पत्नी का पूर्णतया दर्जा दो ही रानियो को प्राप्त है। बाकि अन्य जातियों की थी ।जो केवल रखलें या दासियां थी। जिन्हे के कारण उन्हे दो र...

राजपूत इतिहास कछुआ वंश 1

            राजपुताना इतिहास – कछवाहा (कछवाह) 1 क्षत्रिय  वंश का इतिहास कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का क्रमबद्द इतिहास लिखने से पहले मैं माँ भवानी के चरणों मेँ नमन करता हूँ। कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का इतिहास लिखने के साथ-साथ मै आपको नरवर व उससे भी पहले के इतिहास के बारे में भी में विस्तार से बताने का प्रयास करूँगा। नरवर से इस कछवाहा (कछवाह) वंश के वट वृक्ष कि शाखाएँ प्रफुलित होकर सर्वत्र फैली है। जो कछवाहा (कछवाह) वंश का इतिहास समझने से पहले बहुत जरुरी है। क्योँकि आज कल कुछ अवसरवादी व हल्कि सोच के गैर राजपूत लोग दूसरो का इतिहास चुराकर तोड़मरोड़कर पेश कर रहे हैं। वे लोग उसमे अपने वंशजो के नाम जोङकर राजपूत वंश के हमारे पूर्वजो को अपने पूर्वज बताकर अपनी जाती या खाँप को उच्च एँव महान साबित करने की सोची समझी चाल के तहत हमारा इतिहास मिटाने कि कोशिस कर रहे हैं। मगर सच तो यह हैकि आज हमारी युवा पीढ़ी जो अक्सर अपना और अपनें पूर्वज वंसजों का जातिगत इतिहास केवल बाज़ारू किताबों और इन्टरनेट पर दी गयी जानकारी की सहायता से कुछ ही जानकारियां ढ...

राजपूत इतिहास कछवाहा वंश 2

             राजपूत इतिहास कछवाहा वंश  2 ब्रह्मा जी ने अपने मानसिक संकल्प से दस प्रजापतियों को उत्पन्न करके उनके द्वारा सम्पूर्ण प्रजा और सृष्टि की रचना है। इसलिये ब्रह्मा जी प्रजापतियों के भी पति कहे जाते हैं। ब्रह्मा जी द्वारा उत्पन्न 17 मानस पुत्रों में से ये दस मुख्य प्रजापति कहे जाते हैं उनका विवरण इस प्रकार हैं :- 01 - मरीचि - मन से मारिचि 02 – अत्रि - नेत्र से अत्रि 03 – अंगिरा - मुख से अंगिरस 04 - पुलस्त्य - कान से पुलस्त्य 05 - पुलह - नाभि से पुलह 06 – क्रतु (यज्ञ) - हाथ से कृतु 07 – भृगु - त्वचा से भृगु 08 - वसिष्ठ 09 - दक्ष - अंगुष्ठ से दक्ष 10 – कर्दम - छाया से कंदर्भ ब्रह्मा के प्रमुख 17 मानस पुत्र :- 11 - गोद से नारद 12 - सनक 13 - सनन्दन 14 - सनातन 15 – सनतकुमार - इच्छा से चार पुत्र – 01 - सनक, 02 - सनन्दन, 03 - सनातन 04 - सनतकुमार, - ब्रह्मा ने सर्वप्रथम जिन चार-सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार पुत्रों का सृजन किया। उनकी सृष्टि रचना के कार्य में कोई रुचि नहीं थी। वे ब्रह्मचर्य रहकर ब्रह्म तत्व को जानने में ही मगन ...

दुनिया का एकलौता मंदिर

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दुनिया का एकलौता मंदिर, जहां राजा राम को दिन में पांच बार दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर!!!!! देश में राजा राम चंद्र का एक ऐसा मंदिर है जहां राम की पूजा भगवान के तौर पर नहीं बल्कि राजा के रूप में की जाती है। अब राजा राम हैं तो उन्हें सिपाही सलामी भी देते हैं। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित ओरछा के राजा राम मंदिर की। यहां राजा राम को सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के पश्चात सलामी दी जाती है। इस सलामी के लिए मध्य प्रदेश पुलिस के जवान तैनात होते हैं। राजा राम का मंदिर देखने में किसी राज महल सा प्रतीत होता है। मंदिर की वास्तुकला बुंदेला स्थापत्य का सुंदर नमूना नजर आता है। कहा जाता है कि राजा राम की मूर्ति स्थापना के लिए चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया जा रहा ता। पर मंदिर बनने से पहले इसे कुछ समय के लिए महल में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है। हर रोज आते हैं राज...