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Showing posts from May 25, 2018

कच्छावाहा राजवंश

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                       कच्छावाहा राजवंश                         राजपूत-कच्छवाहा-सूर्यवंश-कुम्भावत शाखा। आमेर के राजा चन्द्रसेन बनबीरोत के पुत्र कुम्भा अपने समय के ख्याति प्राप्त वीर योद्धा एवं पराक्रमी थे। हिन्दाल पठान के द्रारा रायमल जी अमरसर पर वि.स.1555 मै कुम्भा जी ने अत्यत विरता दिखाते हुऐ। विरगति को प्राप्त हुऐ। इन्हि के वंशज कुम्भावत कहे लाऐ। कुम्भा जी के पुत्र उदयकर्ण को महार की जागीरी मिली।  इनके वंशज लुर्णकर्ण जी भी तजस्वी व प्रतापी थें। उनको रावत की विषश पदवी दी गई। इस कारण लुर्णकर्ण जी के रावत भी कहलाऐ।  लुर्णकर्ण जी के चार  पुत्र रामजी कर्मसिह जी(3व4के नाम ज्ञात नहीं) बडे पोत्र राम जी महार रहे छोटे कर्मसिह जी पाड़ली ठीकाना मिला। बाद मै छुट गया। ओर उनके वंशजो को दातंली ठिकाना मिला।(मेहन्दीपुर के बालाजी के नजदीक ) दौसा  तीसरे पोत्र के वंशज झुन्झुनू जिला मे बाजवा,हरिडिया,लामा ढाडी, टिलोडी मे आज भी निवास.करते है।  ये राव...

रत्नावत कछ्वाहा

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                         रत्नावत कछ्वाहा राजपूत +-सूर्य वंश-शाखा -रत्नावत कछ्वाहा। रत्नावत - दासासिहं (दासाजी) के पुत्र रतनसिहं के वंशज रत्नावत कहलाऐ। दासाजी,नरूजी क पुत्र थे, हां हुक्म वही नरूजी जिन्है से नरूका वंश चले रहा है।  हम यू भी कहै सकते है।की रत्नावत नरूका कछवाहा की उप शाखा है। प्राचिन अलवर राज्य(  वर्तमान मै राजस्थान का जिला है।) मे रत्नावतो के पांच मुख्य ठिकाने थे। 1.मेहरू - वर्तमान भारत के राजस्थान के टोक जिले में है। 2. निमेडा़-वर्तमान भारत के राजस्थान में जयपुर जिले के फागीं तहसील में है। 3.खेर-वर्तमान भारत में राजस्थान के अलवर जिले में है। 4.तिराजू-वर्तमान भारत के राजस्थान के टोक जिले में है। 5.केरवालिया-वर्तमान में भारत राजस्थान के बाराँ जिले मे है। रत्नावत कछवाहा नरूका कछवाहा की ही उपशाखा है। महाराज मेहराज जी,   (मिराजजी) के वंशज नरूजी के वशंज नरूका कहलाऐ।मेराज जी बरसिहं जी के पुत्र ओर उदयक्रण जी के पोते है। नरूजी के पोत्र दासासिहं (दासाजी) दासाजी के  पुत्र रतनज...