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Showing posts from May 26, 2018

राजपूताना स्टोरी

                    भुली और बिसरी, एक कहानी  जैसा क़िस्सा और इतिहास का हिस्सा.... कीरत रो धाड़ो कियो !! " दियां रा देवल़ चढै" री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है।राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै- दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो, प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।। इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी  कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ?पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है। कोटड़ियो बाघो कठै आसो डाभी आज। गवरीजै जस गीतड़ा गया भींतड़ा भाज।। कोई कितरो ई धनवान कै बल़वान होवो पण जितैतक उणरै मन में उदारता कै त्याग नीं है उतैतक बो किणी रै मन में आपरै प्रति अनुराग नीं जगा सकै।लोग तो उणांनै ईज याद करै जिकै धन नै  हाथ रो मैल मानता आया है- अत्थ जिकां दी आपणी, हरख गरीबां हत्थ। गवरीजै जस गीतड़ा , तांत तणक्कां सत्थ। या हेली थारै कंथ रै , मिटै न मंगणियार। जद जागूं जद सांभल़ू, तांत तणी तणकार!! ऐड़ै दातारां री उदारता नै अखी राखण सारू...

मैंने उसकोजब-जब देखा,लोहा देखा।लोहे जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा

                        मैंने उसकोजब-जब देखा,लोहा देखा।लोहे जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा। #यह_ही_है_क्षत्राणी          यथार्थ में देखा जाए तो क्षत्राणीयों का इतिहास व उनके क्रियाकलाप उतने प्रकाश में नहीं आए जितने क्षत्रियों के। क्षत्राणीयों के इतिहास पर विहंगम दृष्टि डालने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि क्षत्रिय का महान त्याग व तपस्या का इतिहास वास्तव में क्षत्राणीयों की देन है।       राजा हिमवान की पुत्री #गंगा ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् श्रीनारायण के चरणों में स्थान पाया और भागीरथ की तपस्या से वे इस सृष्टि का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई। उन्हीं की छोटी बहन #पार्वती ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् सदाशिव को पति के रूप में प्राप्त किया व दुष्टों का दलन करने वाले स्वामी कार्तिकेय और देवताओं में अग्रपूजा के अधिकारी गणेश जैसे पुत्रों की माता बनी। महाराजा गाधि की पुत्री व विश्वामित्र जी की बड़ी बहन #सरस्वती अपनी तपस्या के बल पर ही जलर...

हमारी_भूलें

  कार्य_व_मार्गदर्शन_की_अवास्तविक_मांग आज लोग कहते है – ” हम काम करना चाहते हैं, लेकिन हमको कोई काम देने वाला नहीं है । हम सामजिक व आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में मार्गदर्शन के लिए तड़प रहे है लेकिन हमको कोई मार्गदर्शन देने वाला नहीं है। ” यह दोनों की मांगे पूरी तरह से असत्य व अपने आप को धोके में डालने वाली है। जो कार्य करना चाहता है , उसको काम करने से संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती और जो मार्ग को खोजना चाहता है , उसे मार्ग को प्राप्त करने से कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। काम की मांग करना अपनी निष्क्रिय पे पर्दा डाल कर अपने आप को भ्रमित करना है । लोग कहते है कि हम श्री क्षत्रिय युवक संघ में काम करना चाहते है । हम काम तब करें , जब हमको कोई अधिकृत व्यक्ति काम करने के लिए कहे । अगर हम वास्तविकता में जाएँ तो यह कथन कतई सही नहीं है , क्योंकि इस कथन के साथ भी दुराग्रह जुड़े हुए है । क्षत्रिय युवक संघ कोनसा है ? इसकी परिभाषा भी हम करें। उस प्रकार से हो तो हमें स्वीकार है अन्यथा नहीं । काम क्या हो व कैसा हो ? यह भी हम कहें जैसे तो तो ठीक है है अन्यथा गलत। फिर काम व मार्गदर्शन कि मांग ...