राजपूताना स्टोरी
भुली और बिसरी, एक कहानी जैसा क़िस्सा और इतिहास का हिस्सा.... कीरत रो धाड़ो कियो !! " दियां रा देवल़ चढै" री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है।राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै- दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो, प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।। इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ?पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है। कोटड़ियो बाघो कठै आसो डाभी आज। गवरीजै जस गीतड़ा गया भींतड़ा भाज।। कोई कितरो ई धनवान कै बल़वान होवो पण जितैतक उणरै मन में उदारता कै त्याग नीं है उतैतक बो किणी रै मन में आपरै प्रति अनुराग नीं जगा सकै।लोग तो उणांनै ईज याद करै जिकै धन नै हाथ रो मैल मानता आया है- अत्थ जिकां दी आपणी, हरख गरीबां हत्थ। गवरीजै जस गीतड़ा , तांत तणक्कां सत्थ। या हेली थारै कंथ रै , मिटै न मंगणियार। जद जागूं जद सांभल़ू, तांत तणी तणकार!! ऐड़ै दातारां री उदारता नै अखी राखण सारू...