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सूडान में आरएसएफ का नया हमला — 28 निर्दोषों की दिल दहला देने वाली मौत

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  सूडान के नॉर्थ दारफुर प्रांत के छोटे से शहर मुस्तारिहा (Mustariha) में आरएसएफ (Rapid Support Forces) ने एक बार फिर निर्दोष नागरिकों पर रॉकेट और ग्राउंड हमले किए, जिसमें कम से कम 28 आम लोग मार दिए गए और 39 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। � Anadolu Ajansı यह हमला उस इलाके के एंटी-ह्यूमनिटेरियन स्थितियों को दर्शाता है, जहाँ पहले से ही भोजन की कमी, विस्थापन और युद्ध-विशेष परिस्थितियाँ विद्यमान हैं। आरएसएफ ने शहर के एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र को नष्ट कर दिया, जिससे घायल लोगों को इलाज के लिए दूसरे गांवों तक जाना पड़ा। स्थानीय चिकित्सा समूह ने कहा कि हमले के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी भी हिरासत में लिया गया है और वह तब से गायब है। � Anadolu Ajansı चिकित्सा समूह ने इस हमले को “अमानवीय, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन” के रूप में करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरएसएफ के नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने की अपील की है। � Anadolu Ajansı यह हमला सूडान में चल रहे संघर्ष का हिस्सा है, जो अप्रैल 2023 से सूडान सरकार और आरएसएफ के बीच जारी है। इस जंग ने लाखों लोगों...

डूरंड लाइन पर भड़का संघर्ष: अफगान सेना का पाकिस्तानी चौकियों पर हमला, सीमा पर तेज़ फायरिंग

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 काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थित डूरंड लाइन पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक अफगानिस्तान की सेना ने सीमा पर मौजूद पाकिस्तानी आर्मी की कई चौकियों को निशाना बनाते हुए हमला किया। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई स्थानों पर जबरदस्त फायरिंग और झड़प की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, इस संघर्ष में कुछ चौकियों के क्षतिग्रस्त होने और दोनों ओर हताहतों की आशंका जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर दोनों देशों की सरकारों ने अभी तक विस्तृत आंकड़े जारी नहीं किए हैं। 🔥 जवाबी कार्रवाई क्यों? यह कार्रवाई उस घटना के दो दिन बाद हुई है जब पाकिस्तान सेना ने अफगान सीमा के भीतर कथित आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का दावा था कि यह कार्रवाई उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत की गई और इसका लक्ष्य तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े ठिकाने थे। पाकिस्तानी वायुसेना की इस बमबारी के बाद अफगानिस्तान की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। अफगान प्रशासन ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि इस हमले का ज...

बाँदनवाड़े का युद्ध – मेवाड़ की आन पर बलिदान

 राजस्थान की वीर भूमि… जहाँ मिट्टी भी शौर्य की कहानी कहती है… आज हम बात करेंगे बाँदनवाड़े के उस ऐतिहासिक युद्ध की, जहाँ मेवाड़ के सेनापति रावत महासिंह सारंगदेवोत ने अपना शीश देकर मेवाड़ की आन बचाई। 📍 युद्ध की पृष्ठभूमि यह घटना उस समय की है जब मेवाड़ और मुगल साम्राज्य के बीच लगातार संघर्ष चल रहा था। मुगल सेनापति रणबाज़ ख़ाँ ने मेवाड़ की ओर कूच किया। उसका उद्देश्य था मेवाड़ की शक्ति को तोड़ना। लेकिन उसे नहीं पता था कि सामने रावत महासिंह जैसे रणबांकुरे खड़े हैं। 🔥 प्रण जिसने इतिहास बना दिया सभा में रावत महासिंह जी ने ऐलान किया — “रणबाज़ ख़ाँ के जितने कदम मेवाड़ की ओर पड़ेंगे, उतनी ज़मीन और उतने कुएँ दान कर दूँगा।” यह केवल वचन नहीं था, यह मेवाड़ की धरती के सम्मान की शपथ थी। ⚔️ युद्ध का भीषण दृश्य बाँदनवाड़ा का मैदान रणभूमि बन चुका था। घोड़ों की टापें… तलवारों की टकराहट… धरती रक्त से लाल हो चुकी थी। अंततः दोनों सेनापति आमने-सामने आ गए। रणबाज़ ख़ाँ ने पूरी ताकत से वार किया — और रावत महासिंह जी का शीश धड़ से अलग हो गया… लेकिन अगले ही क्षण… रावत साहब की तलवार भी चल चुकी थी… रणबाज़ ख़ाँ क...
शहबाज शरीफ कतर पहुंचे: पाकिस्तान-अफगान तनाव और TTP एयर स्ट्राइक पर बड़ी कूटनीतिक चाल इस्लामाबाद/दोहा: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हालिया सैन्य तनाव के बीच कतर पहुंचे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान वायुसेना ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाते हुए सीमा पार एयर स्ट्राइक की। पाकिस्तान का दावा है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर की गई। अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया अफगान अधिकारियों ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। कुछ रिपोर्टों में नागरिक हताहतों की भी चर्चा की गई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। कतर क्यों पहुंचे शहबाज शरीफ? विशेषज्ञों का मानना है कि कतर की भूमिका मध्यस्थ के रूप में अहम हो सकती है। कतर पहले भी क्षेत्रीय वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। आगे क्या? अगर कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है। अन्यथा सीमा पर हालात और गंभीर हो सकत...
  भारत‑अमेरिका ट्रेड तनाव: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ अपडेट भारत‑अमेरिका ट्रेड तनाव: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ अपडेट अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में व्यापार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सुर्खियों में रहा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) में बदलाव किया है। यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है। हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच संबंध समाप्त हो गए हैं। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार के दौरान लगाए गए कुछ टैरिफ को संशोधित करने का निर्णय लिया। भारत पर कुछ आयातों पर पहले जो शुल्क 15–25% तक था, अब लगभग 10% तक घटा दिया गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से व्यापार संतुलन और अमेरिकी कंपनियों की मांग के मद्देनजर किया गया है। भारत-Америка व्यापार पर असर इस फैसले से भारत में कई उत्पादों की आयात लागत कम हो सकती है। इससे भारतीय उद्योगों के ...

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन-नैटो के सभी सदस्‍यों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्‍पाद का पांच प्रतिशत करने पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

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नीदरलैंड्स के हेग में नैटो सम्‍मेलन में घोषणा पत्र में नेताओं ने कहा कि इस संकल्‍प में रक्षा क्षेत्र की प्रमुख आवश्‍यकताओं में प्रति वर्ष सकल घरेलू उत्‍पाद का कम से कम तीन दशमलव पांच प्रतिशत निवेश होगा। उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचों की रक्षा और गठबंधन के रक्षा औद्योगिक अड्डों को सुदृढ़ करने सहित सुरक्षा संबंधी खर्चों पर सकल घरेलू उत्‍पाद का एक दशमलव पांच प्रतिशत खर्च करने का संकल्‍प लिया। नैटो प्रमुख मार्क रूट ने कहा कि इस वर्ष यूक्रेन के लिए सैन्‍य सहायता पिछले वर्ष के 58 अरब डॉलर से बढ़ने की उम्‍मीद है। उन्‍होंने कहा कि यूरोप और कनाडा को सैन्‍य गठबंधन में और अधिक योगदान करने की जरूरत है। श्री रूट ने कहा कि रूस से अल्‍पावधि और दीर्घकावधि में खतरा है। उन्‍होंने कहा कि नैटो को अटलांटिक के दोनों ओर रक्षा औद्योगिक क्षमताओं का तेजी से विकास करना होगा।  

डिग्रीयां तो अब देश के माननीय गृहमंत्री, आधुनिक भारत के प्रतीकात्मक लौहपुरुष और चाणक्य अमित शाह जी की भी चेक कर लेनी चाहिए।

 डिग्रीयां तो अब देश के माननीय गृहमंत्री, आधुनिक भारत के प्रतीकात्मक लौहपुरुष और चाणक्य अमित शाह जी की भी चेक कर लेनी चाहिए।  https://www.facebook.com/share/v/sjKq13dQgKont9zg/?mibextid=oFDknk जयपुर के संस्थापक जिस सवाई जय सिंह को इतिहासकार सतीश चन्द्र अठारहवी सदी का सबसे महान शासक बताते हैं उस सवाई जयसिंह को माननीय गृह मंत्री जी 16 वी सदी में लेकर चले गए।  वैसे अखंड हिंदू राष्ट्र के पैरोकार अमित शाह जी को जानकारियां नज़रे पेश करना चाहता हूं।  सवाई जयसिंह वह अंतिम शासक था जिसने अश्वमेघ यज्ञ करवाया था। सवाई जयसिंह ने ही मधुरा,वृंदावन में औरंगजेब द्वारा तोड़े गए सब मंदिरों को फिर से बनवाया। सवाई जयसिंह ने ही अयोध्या में मंदिर मामले को सुलझाने के लिए अयोध्या के आसपास की सब जमीन खरीद ली लेकिन असमय मृत्यु होने के कारण वे यह काम पूरा नहीं कर सके। अयोध्या के पास आज भी एक गांव बसा है उसे जयसिंह पूरा कहा जाता है। महान विद्वान श्री कृष्ण भट्ट ने सवाई जयसिंह को हिंदू संस्कृति का पुनरुद्धारकर्ता कहा है। राजस्थान का तथ्यात्मक इतिहास लिखने वाले कर्नल जेम्स टॉड ने "ऐनल्स एंटीक्वीटी...