भारत‑अमेरिका ट्रेड तनाव: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ अपडेट भारत‑अमेरिका ट्रेड तनाव: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ अपडेट अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में व्यापार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सुर्खियों में रहा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) में बदलाव किया है। यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है। हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच संबंध समाप्त हो गए हैं। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार के दौरान लगाए गए कुछ टैरिफ को संशोधित करने का निर्णय लिया। भारत पर कुछ आयातों पर पहले जो शुल्क 15–25% तक था, अब लगभग 10% तक घटा दिया गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से व्यापार संतुलन और अमेरिकी कंपनियों की मांग के मद्देनजर किया गया है। भारत-Америка व्यापार पर असर इस फैसले से भारत में कई उत्पादों की आयात लागत कम हो सकती है। इससे भारतीय उद्योगों के ...
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उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन-नैटो के सभी सदस्यों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का पांच प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है।
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नीदरलैंड्स के हेग में नैटो सम्मेलन में घोषणा पत्र में नेताओं ने कहा कि इस संकल्प में रक्षा क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं में प्रति वर्ष सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम तीन दशमलव पांच प्रतिशत निवेश होगा। उन्होंने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की रक्षा और गठबंधन के रक्षा औद्योगिक अड्डों को सुदृढ़ करने सहित सुरक्षा संबंधी खर्चों पर सकल घरेलू उत्पाद का एक दशमलव पांच प्रतिशत खर्च करने का संकल्प लिया। नैटो प्रमुख मार्क रूट ने कहा कि इस वर्ष यूक्रेन के लिए सैन्य सहायता पिछले वर्ष के 58 अरब डॉलर से बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यूरोप और कनाडा को सैन्य गठबंधन में और अधिक योगदान करने की जरूरत है। श्री रूट ने कहा कि रूस से अल्पावधि और दीर्घकावधि में खतरा है। उन्होंने कहा कि नैटो को अटलांटिक के दोनों ओर रक्षा औद्योगिक क्षमताओं का तेजी से विकास करना होगा।
डिग्रीयां तो अब देश के माननीय गृहमंत्री, आधुनिक भारत के प्रतीकात्मक लौहपुरुष और चाणक्य अमित शाह जी की भी चेक कर लेनी चाहिए।
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डिग्रीयां तो अब देश के माननीय गृहमंत्री, आधुनिक भारत के प्रतीकात्मक लौहपुरुष और चाणक्य अमित शाह जी की भी चेक कर लेनी चाहिए। https://www.facebook.com/share/v/sjKq13dQgKont9zg/?mibextid=oFDknk जयपुर के संस्थापक जिस सवाई जय सिंह को इतिहासकार सतीश चन्द्र अठारहवी सदी का सबसे महान शासक बताते हैं उस सवाई जयसिंह को माननीय गृह मंत्री जी 16 वी सदी में लेकर चले गए। वैसे अखंड हिंदू राष्ट्र के पैरोकार अमित शाह जी को जानकारियां नज़रे पेश करना चाहता हूं। सवाई जयसिंह वह अंतिम शासक था जिसने अश्वमेघ यज्ञ करवाया था। सवाई जयसिंह ने ही मधुरा,वृंदावन में औरंगजेब द्वारा तोड़े गए सब मंदिरों को फिर से बनवाया। सवाई जयसिंह ने ही अयोध्या में मंदिर मामले को सुलझाने के लिए अयोध्या के आसपास की सब जमीन खरीद ली लेकिन असमय मृत्यु होने के कारण वे यह काम पूरा नहीं कर सके। अयोध्या के पास आज भी एक गांव बसा है उसे जयसिंह पूरा कहा जाता है। महान विद्वान श्री कृष्ण भट्ट ने सवाई जयसिंह को हिंदू संस्कृति का पुनरुद्धारकर्ता कहा है। राजस्थान का तथ्यात्मक इतिहास लिखने वाले कर्नल जेम्स टॉड ने "ऐनल्स एंटीक्वीटी...
बीजेपी के विरोध की वजह :राजपूत समाज
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बीजेपी के विरोध की वजह : मध्य प्रदेश के पिछली सरकार में मंत्री रहे बिसाहू लाल साहू ने कहा था की राजपूत समाज की महिलाओं को पकड़ के घर से बाहर लाया जाए तभी समाज में समानता आएगी। विरोध के बाद भी फिर से राज्य के चुनाव में बिसाहू लाल को बीजेपी ने टिकट दे दिया। राजनीति में लोग कई तरह की बाते बोलते हैं लेकिन कोई इस स्तर पर गिरेगा और उसे तमाम विरोध के बाद भी हिंदूवादी ,राष्ट्रवादी पार्टी दुबारा टिकट देगी तो इसे क्या कहा जाना चाहिए? अभी हम खुद की स्थिति जानते हैं लेकिन ये सारी बाते हमारे मनोमस्तिष्क पर सदैव अंकित रहेगी ।
Jaipur citypalace Diya Kumari Raj parivar ke dwara coronavirus sham 5:00...
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औरंगजेब ने मथुरा का श्रीनाथ मंदिर तोड़ा
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जब औरंगजेब ने मथुरा का श्रीनाथ मंदिर तोड़ा तो मेवाड़ के नरेश राज सिंह 100 मस्जिद तुड़वा दिये थे। अपने पुत्र भीम सिंह को गुजरात भेजा, कहा 'सब मस्जिद तोड़ दो तो भीम सिंह ने 300 मस्जिद तोड़ दी थी'। वीर दुर्गादास राठौड़ ने औरंगजेब की नाक में दम कर दिया था और महाराज अजीत सिंह को राजा बनाकर ही दम लिया। कहा जाता है कि दुर्गादास राठौड़ का भोजन, जल और शयन सब अश्व के पार्श्व पर ही होता था। वहाँ के लोकगीतों में ये गाया जाता है कि यदि दुर्गादास न होते तो राजस्थान में सुन्नत हो जाती। वीर दुर्गादास राठौड़ भी शिवाजी के जैसे ही छापामार युद्ध की कला में विशेषज्ञ थे। मध्यकाल का दुर्भाग्य बस इतना है कि हिन्दू संगठित होकर एक संघ के अंतर्गत नहीं लड़े, अपितु भिन्न भिन्न स्थानों पर स्थानीय रूप से प्रतिरोध करते रहे। औरंगजेब के समय दक्षिण में शिवाजी, राजस्थान में दुर्गादास, पश्चिम में सिख गुरु गोविंद सिंह और पूर्व में लचित बुरफुकन, बुंदेलखंड में राजा छत्रसाल आदि ने भरपूर प्रतिरोध किया और इनके प्रतिरोध का ही परिणाम था कि औरंगजेब के मरते ही मुगलवंश का पतन हो गया। इतिहास साक्षी रहा है कि जब जब आतता...