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Showing posts from January 11, 2019

साहब बहुत भेदभाव हुआ दलितों के साथ।

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अजी साहब बहुत भेदभाव हुआ दलितों के साथ।उनसे खेतों में काम कराया गया।हरवाही कराई गई।गोबर उठवाया गया।उन्हें शिक्षा से वंचित रखा गया। साब बहुत जुल्म हुआ दलितों पे ..! यह बात बहुत जोरों से सोशल मीडिया,मास मीडिया के माध्मय से में लोगो को बताई जा रही है। मगर 1400 साल पहले जब मक्का से इंसानी खून की प्यासी इस्लाम की तलवार लपलपाते हुए निकली तो ... एक झटके में ही...ईरान,इराक,सीरिया,मिश्र,दमिश्,अफगानिस्तान, कतर, बलूचिस्तान से ले के मंगोलिया और रूस तक ध्वस्त होते चले गए। स्थानीय धर्मों परम्पराओं का तलवार के बल पर  लोप कर दिया गया और सर्वत्र इस्लाम ही इस्लाम हो गया। शान से इस्लाम का झंडा आसमान चूमता हुआ अफगानिस्तान होते हुए सिंध के रास्ते हिंदुस्तान पहुंचा। पर यहां पहुंचते ही इस्लाम की लगाम आगे बढ़ के क्षत्रियों ने थाम ली जिसके कारण भीषण रक्तपात हुआ। आठ सौ साल तक क्षत्रिय राजवंशों से ले के आम क्षत्रियों ने इस्लाम की नकेल ढीली न पड़ने दी।इनका साथ भी दिया जाटों ने,गुज्जरों ने, यादवों ने, ब्राह्मणों ने वैश्यों ने ..! पर ये लोग फ्रंट लाइनर नही रहे कभी।सिर्फ आत्मरक्षार्थ डटे रह...
लत्ता अस कलकत्ता हालय, लंदन बैठि लाट थर्राय॥ राजपूत ना रहने देगें, कल के सबको देंय भगाय।। जब दल उमड़य उमरगढ़ का थरथर कापय मोहम्मदाबाद। सुनसुन बातैं खुफिया जन की,भगैं फिरंगी ले मरजाद।।  यह लोकगीत उस अमर शहीद की याद दिलाता हे जिसने देश की आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। उस वीर का नाम था राजा दिग्विजय सिंह जिसने लखनऊ का नाम इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। राजा दिग्विजय सिंह जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से लोहा लिया था। उमरगढ़ के राजा दिग्विजय सिंह ने मडिय़ांव इलाके में छावनी सैनिकों का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजायी तथा उन्हें आगे बढऩे से रोक दिया मजबूरन अंग्रेजों को रेजीडेंसी में शरण लेनी पड़ी थी। राजधानी के महोना ताल्लुक स्थित उमरिया गांव(उमरगढ़) किले में राजा दिग्विजय सिंह रहा करते थे। गांव के लोग आज भी लोकगीतों के माध्यम से उन्हें याद करते हैं। राजा दिग्विजय सिंह पर चलाए गए मुकदमें बताते हैं कि किस प्रकार उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया और मडिय़ांव व चिनहट इलाके में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को हिन्दुस्तानी ...

कैसा पराक्रमी वीर उत्तर भड़ किवाड़ भाटी (रावल भोजदेव)

अद्भुत योद्धा रावल भोजदेव ।। ( रावल विजयराज लांझा के पुत्र व राहड़ जी के बड़े भाई) काक नदी की पतली धारा किनारों से विरक्त सी होकर धीरे धीरे सरक रही थी, आसमान ऊपर चुपचाप पहरा दे रहा था और नीचे लुद्रवा देश की धरती, जिसे उत्तर भड़ किवाड़ भाटी आजकल जैसलमेर कहा जाता है । प्रभात काल में खूंटी तानकर सो रही थी, नदी के किनारे से कुछ दूरी पर लुद्रवे का प्राचीन दुर्ग गुमसुम सा खड़ा रावल देवराज का नाम स्मरण कर रहा था | ‘कैसा पराक्रमी वीर था ! अकेला होकर जिसने बाप का बैर लिया | पंवारों की धार पर आक्रमण कर आया और यहाँ युक्ति, साहस और शौर्य से मुझ पर भी अधिकार कर लिया | साहसी अकेला भी हुआ तो क्या हुआ ? हाँ ! अकेला भी अथक परिश्रम,ज्ञासाहस और सत्य निष्ठा से संसार को अपने वश में कर लेता है ….| उसका विचार -प्रवाह टूट गया, वृद्ध राजमाता रावल भोजदेव को पूछ रही है ‘ बेटा गजनी के बादशाह की फौजे अब कितनी दूर होंगी ?’ ‘ यहाँ से कोस भर दूर मेढ़ों के माल में |’ ‘ और तू चुपचाप बैठा है ?’ ‘ तो क्या करूँ ? मैंने बादशाह को वायदा किया कि उसके आक्रमण की खबर आबू नहीं पहुंचाउंगा और बदले में बादशाह ने भी वायदा किया...

वर्तमान भारतीय राजनीति के लौहपुरुष गृहमंत्री राजनाथ सिंह . आइये जाने कैसे

आज कल भारतीय समाज मे एक नया ट्रेंड चला है खासकर सोशल मीडिया पर . ज्यादातर लोगों को सच्चाई और तथ्यों से कोई मतलब नही होता है बस गन्दी राजनीति या असमाजिक तत्वों द्वारा चलाये अभियान में अपना योगदान देना शुरू कर देते हैं. ऐसा ही माहौल पिछले कुछ साल से देश के एक बरिष्ठ नेता के खिलाफ देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर लोग विना तर्क के एक शान्त स्वभाव और गंम्भीर पद्ति से जीवन जीने वाले नेता राजनाथ सिंह पर तंज कसते नज़र आते है. कुछ मूर्ख या पार्टी भक्त उनके नाम तक को विगाड़कर राजनाथ सिंह की जगह निंदानाथ तक कहते दिखे हैं. तो कुछ लोग जो कई तथ्यों को देखकर और राजनाथ सिंह के जीबन के आधार पर उन्हें लौहपुरुष भी कहते दिखे . पर आज हम तथ्यों के जरिये देखते हैं कि असल जीवन मे राजनाथ सिंह हैं कौन ? निंदानाथ या लौहपुरुष  . इस बात को मैंने भी समझने की कोशिश की राजनीति में सबसे बड़ी बात की आज लगभग हर छोटे बड़े नेता पर कई आरोप लगते रहते हैं चाहें वो भ्र्ष्टाचार का आरोप हो या कुछ और पर राजनाथ सिंह पर उनके इतने विशाल राजनैतिक जीवन मे एक भी दाग नही लगा है. छोटे से बिधायक पद से लेकर देश के गृहमंत्री के पद त...