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महाराणा सांगा जब चितोड़ के शाशक
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मंझला कद , मोटा चेहरा , गेहुआ रंग और बड़ी बड़ी आँखो वाले महाराणा सांगा भारत की धरती के वे वीर पुत्र है , जिन्होंने मध्यकाल के उस खुनी दौर में अपने सीने पर तोप के गोले ले लिए थे। महाराणा २४ मई १५०९ ईस्वी को महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ के सिंहासन पर विराजमान हुए। इन्हें ही इतिहास में महाराणा सांगा के नाम से जाना जाता है। महाराणा सांगा के काल में मेवाड़ की सैनिक शक्ति अपने चरम पर पहुँच गयी थी , उनकी सेना में एक लाख सैनिक तथा ५०० हाथी थे। ७ बड़े राजा , ९ राव और १०८ रावत महाराणा सांगा के अधीन थे। बाबर का सामना करने से पूर्व १०८ बड़ी लड़ाईया उन्होंने मालवा के सुल्तानों से लड़ी थी , और सभी जीती। राणा सांगा के आगे कोई दूसरा राजा कान हिलाता ना था। जोधपुर तथा आमेर के राजा महाराणा सांगा का पूरा सम्मान करते थे , ग्वालियर , अजमेर , सीकरी , रायसेन , कालपी , चंदेरी , बूंदी , गगनौर , रामपुरा तथा आबू जैसे शक्तिशाली प्रदेश उनके सामंत हुआ करते थे। महाराणा सांगा जब चितोड़ के शाशक बने थे , उस समय उनका राज्य चारो और से शत्रुओ से ही घ...