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Bhanwar singh rajawat basdi kala

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bhanwar singh rajawat

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Bhanwar singh rajawat

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कछवाह राजवंश की कुलदेवी श्री जमवाय माता

     कछवाह राजवंश की कुलदेवी श्री जमवाय माता आज आपको हम कछवाह राजवंश की कुलदेवी के बारे में बताते है । । अयोध्या राज्य के राजा भगवान श्री रामचन्द्र जी के पुत्र राजा कुश के वंशज कछवाह कहलाते है । जिनका राज्य अयोध्या से चलकर रोहताशगढ ( बिहार ) में रहा , वहा से चलकर इन्होने अपनी राजधानी नरवर ( ग्वालियर राज्य ) में बनाई । नरवर (ग्वालियर ) राज्य के अंतिम राजा दुलहराय जी ने अपनी राजधानी सर्वप्रथम राजस्थान में दौसा राज्य में स्थापित की , दौसा से इन्होने ढूढाड क्षेत्र में मॉच गॉव पर अपना अधिकार किया जहॉ पर मीणा जाति का कब्जा था , मॉच ( मॉची ) गॉव के  पास ही कछवाह राजवंश के राजा दुलहराय जी ने अपनी कुलदेवी श्री जमवाय माता जी का मंदिर बनबाया । कछवाह राजवंश के राजा दुलहराय जी ने अपने ईष्टदेव भगवान श्री रामचन्द्र जी तथा अपनी कुलदेवी श्री जमवाय माता जी के नाम पर उस मॉच (मॉची ) गॉव का नाम बदल कर जमवारामगढ रखा जमवारामगढ में अपना राज्य स्थापित किया । राजा दुलहराय जी के दो पुत्र हुये  कॉकिलदेव और वीकलदेव जिसमें कॉकिलदेव जी ने मीणाओ से आमेर का किला छीनकर अपना नया राज्य स...

राजपूताना स्टोरी

                    भुली और बिसरी, एक कहानी  जैसा क़िस्सा और इतिहास का हिस्सा.... कीरत रो धाड़ो कियो !! " दियां रा देवल़ चढै" री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है।राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै- दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो, प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।। इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी  कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ?पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है। कोटड़ियो बाघो कठै आसो डाभी आज। गवरीजै जस गीतड़ा गया भींतड़ा भाज।। कोई कितरो ई धनवान कै बल़वान होवो पण जितैतक उणरै मन में उदारता कै त्याग नीं है उतैतक बो किणी रै मन में आपरै प्रति अनुराग नीं जगा सकै।लोग तो उणांनै ईज याद करै जिकै धन नै  हाथ रो मैल मानता आया है- अत्थ जिकां दी आपणी, हरख गरीबां हत्थ। गवरीजै जस गीतड़ा , तांत तणक्कां सत्थ। या हेली थारै कंथ रै , मिटै न मंगणियार। जद जागूं जद सांभल़ू, तांत तणी तणकार!! ऐड़ै दातारां री उदारता नै अखी राखण सारू...