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क्रांतिवीर: बलजी-भुरजी शेखावत

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                 क्रांतिवीर: बलजी-भुरजी शेखावत    राजस्थान राज्य की जागीर बठोठ-पटोदा के ठाकुर बलजी शेखावत दिनभर अपनी जागीर के कार्य निपटाते,लगान की वसूली करते,लोगों के झगड़े निपटाकर न्याय करते,किसी गरीब की जरुरत के हिसाब से आर्थिक सहायता करते हुए अपने बठोठ के किले में शान से रहते ,पर रात को सोते हुए उन्हें नींद नहीं आती,बिस्तर पर पड़े पड़े वे फिरंगियों के बारे में सोचते कि कैसे वे व्यापार करने के बहाने यहाँ आये और पुरे देश को उन्होंने गुलाम बना डाला | ज्यादा दुःख तो उन्हें इस बात का होता कि जिन गरीब किसानों से वे लगान की रकम वसूल कर सीकर के राजा को भेजते है उसका थोड़ा हिस्सा अंग्रेजों के खजाने में भी जाता | रह रह कर उन्हें फिरंगियों पर गुस्सा आता और साथ में उन राजाओं पर भी जिन्होंने अंग्रेजों की दासता स्वीकार करली थी | पर वे अपना दुःख किसे सुनाये,अकेले अंग्रेजों का मुकाबला भी कैसे करें सभी राजा तो अंग्रेजों की गोद में जा बैठे थे | उन्हें अपने पूर्वज डूंगरसीं व जवाहरसीं की याद भी आती जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ा...

राजावत ठिकाना भैसावा इतिहास

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  पूरणमललोत राजावत ठिकाना भैसावा                         भाग 1 ख्यात अनुसार राजावत कछवाहोँ का पीढी क्रम ईस प्रकार है – 01 - भगवान श्री राम -  भगवान श्री राम के बाद कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत राजवंश का इतिहास इस प्रकार भगवान श्री राम का जन्म ब्रह्माजी की 67वीँ पिढी मेँ और ब्रह्माजी की 68वीँ पिढी मेँ लव व कुश का जन्म हुआ।  भगवान श्री राम के दो पुत्र थे –         01 - लव        02 - कुश रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी की महान धरा एवं माता सीता के पुत्र लव-कुश का जन्म स्थल कहे जाने वाला धार्मिक स्थल तुरतुरिया है। - लव और कुश राम तथा सीता के जुड़वां बेटे थे। जब राम ने वानप्रस्थ लेने का निश्चय कर भरत का राज्याभिषेक करना चाहा तो भरत नहीं माने। अत: दक्षिण कोसल प्रदेश (छत्तीसगढ़) में कुश और उत्तर कोसल में लव का अभिषेक किया गया। राम के काल में भी कोशल राज्य उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में विभाजित था। कालिदास के रघुवंश अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का औ...

निपाह वायरस

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    निपाह वायरस के मरीज का इलाज करने वाली नर्स की मौत, पति के लिए छोड़ा इमोशनल मैसेज नई दिल्ली : "मैं बस जा ही रही हूं... मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी... माफ कीजिएगा... हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा..." अपने पति के लिए यह गुडबाय नोट लिखा था नर्स लिनी पुथुस्सेरी ने, जो नए निपाह वायरस का चौथा शिकार बनीं. उनका दाह संस्कार भी आनन-फानन में कर दिया गया, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके, और इसी कारण वह अपने परिवार को देख भी नहीं पाई. 31-वर्षीय लिनी की दो संतानें हैं - सात साल और दो साल की. अपने पति को लिखे एक बेहद भावुक नोट में नर्स लिनी ने लिखा, "साजी चेट्टा, मैं बस जा ही रही हूं... मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी... माफ कीजिएगा... हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा... हमारा मासूम बच्चा, उसे खाड़ी देशों में ले जाइएगा... उन्हें उस तरह अकेला नहीं रहना चाहिए, जिस तरह हमारे पिता रहे... बहुत-सा प्यार..." लिनी का यह नोट सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है, और पढ़ने वालों की आंखों को नम कर रहा है.माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर बहुत-से लोगों ने युवा नर...

सामन्त क्या होते थे इस लेख से पता चल जाएगा

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बिना ठाकुर(सामन्त/जागीरदार) के किसी भी गाँव की कल्पना ही नही की जा सकती थी। हर गाँव की रक्षा हेतु किसी राजपूत को ठाकुर का पद दे दिया जाता था न कि सिर्फ लगान वसूलने के लिए इसी बात पर एक किस्सा पेश कर रहा हूँ । अंग्रेजो ने दिल्ली के अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को बन्दी बना लिया और मुगलो का जम कर कत्लेआम किया । सल्तनत खत्म होने से मुगल सेना कई टुकड़ो में बिखर गयी और देश के कई हिस्सों में जान बचा कर छुप गयी । पेट भरने के लिए कोई रोजगार उन्हें आता नही था क्योंकि मुगल सदैव चोरी लूटपाट और बलात्कार जेसे गन्दे और घ्रणित कार्यो में ही व्यस्त रहे इसलिए वो छोटे गिरोह बना कर लूटपाट करने लगे । बीकानेर रियासत में न्याय प्रिय राजा गंगा सिंह जी का शासन था जिन्होंने गंग नहर(सबसे बड़ी नहर) का निर्माण करवाया जिसको कांग्रेस सरकार ने इन्दिरा गांधी नहर नाम देकर हड़प लिया बनवाई थी । उन्ही की रियासत के गाँव आसलसर के जागीरदार श्री दीप सिंह जी शेखावत की वीरता और गौ और धर्म रक्षा के चर्चे सब और होते थे । "तीज" का त्यौहार चल रहा था और गाँव की सब महिलाये और बच्चियां गांव से 2 किलोमीट...

Bhanwar Singh Rajawat Basdi kala

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राजपूत कछवाहा वंश 3

               राजपूत इतिहास  कछवाहा वंश 3 जय कुलदेवी जमुवाय भवानी। धर्मरक्षक राजा मानसिहं आमेर जिनकी चर्चा  दूर दूर तक थी। बल बुध्दि चातुर्य धर्मरक्षक राजामानसिहं, उनके विजय अभियान अफगान, फारस ,मंगोल ,इत्यादि यवन राज्य व श्रीलंका तक थे। उनका भय यवनों में इतना था । इतना कहर भरपाया की आज भी उनके नाम का भय जारी है। वो कोई ओर नही राजा मानसिहं आमेर थे। पर कुछ धर्म विरोधीयों ने इनका वर्तमान में इनका इतिहास इतना धूमिल कर दिया है। जिसकी कोई सिमा नही आज उनके सामने सत्य प्रमाणिक आधार पर साबित करतें है। पर इन झुठों से इस देश से धर्म रक्षकों का सत्य कोई नही छिन सकता हैं। वो सत्य थे।सत्य ही रहेगें।।                       भारमल जी की शादी -पृथ्वीराज सिहं (प्रिथीराज) के पुत्र भारमल जी ने बहुत सी शादीयां की थी। राजपुत वंश की दो ही शादीयां  की है। अतं पत्नी का पूर्णतया दर्जा दो ही रानियो को प्राप्त है। बाकि अन्य जातियों की थी ।जो केवल रखलें या दासियां थी। जिन्हे के कारण उन्हे दो र...

राजपूत इतिहास कछुआ वंश 1

            राजपुताना इतिहास – कछवाहा (कछवाह) 1 क्षत्रिय  वंश का इतिहास कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का क्रमबद्द इतिहास लिखने से पहले मैं माँ भवानी के चरणों मेँ नमन करता हूँ। कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का इतिहास लिखने के साथ-साथ मै आपको नरवर व उससे भी पहले के इतिहास के बारे में भी में विस्तार से बताने का प्रयास करूँगा। नरवर से इस कछवाहा (कछवाह) वंश के वट वृक्ष कि शाखाएँ प्रफुलित होकर सर्वत्र फैली है। जो कछवाहा (कछवाह) वंश का इतिहास समझने से पहले बहुत जरुरी है। क्योँकि आज कल कुछ अवसरवादी व हल्कि सोच के गैर राजपूत लोग दूसरो का इतिहास चुराकर तोड़मरोड़कर पेश कर रहे हैं। वे लोग उसमे अपने वंशजो के नाम जोङकर राजपूत वंश के हमारे पूर्वजो को अपने पूर्वज बताकर अपनी जाती या खाँप को उच्च एँव महान साबित करने की सोची समझी चाल के तहत हमारा इतिहास मिटाने कि कोशिस कर रहे हैं। मगर सच तो यह हैकि आज हमारी युवा पीढ़ी जो अक्सर अपना और अपनें पूर्वज वंसजों का जातिगत इतिहास केवल बाज़ारू किताबों और इन्टरनेट पर दी गयी जानकारी की सहायता से कुछ ही जानकारियां ढ...