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Showing posts from 2020
औरंगजेब ने मथुरा का श्रीनाथ मंदिर तोड़ा
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जब औरंगजेब ने मथुरा का श्रीनाथ मंदिर तोड़ा तो मेवाड़ के नरेश राज सिंह 100 मस्जिद तुड़वा दिये थे। अपने पुत्र भीम सिंह को गुजरात भेजा, कहा 'सब मस्जिद तोड़ दो तो भीम सिंह ने 300 मस्जिद तोड़ दी थी'। वीर दुर्गादास राठौड़ ने औरंगजेब की नाक में दम कर दिया था और महाराज अजीत सिंह को राजा बनाकर ही दम लिया। कहा जाता है कि दुर्गादास राठौड़ का भोजन, जल और शयन सब अश्व के पार्श्व पर ही होता था। वहाँ के लोकगीतों में ये गाया जाता है कि यदि दुर्गादास न होते तो राजस्थान में सुन्नत हो जाती। वीर दुर्गादास राठौड़ भी शिवाजी के जैसे ही छापामार युद्ध की कला में विशेषज्ञ थे। मध्यकाल का दुर्भाग्य बस इतना है कि हिन्दू संगठित होकर एक संघ के अंतर्गत नहीं लड़े, अपितु भिन्न भिन्न स्थानों पर स्थानीय रूप से प्रतिरोध करते रहे। औरंगजेब के समय दक्षिण में शिवाजी, राजस्थान में दुर्गादास, पश्चिम में सिख गुरु गोविंद सिंह और पूर्व में लचित बुरफुकन, बुंदेलखंड में राजा छत्रसाल आदि ने भरपूर प्रतिरोध किया और इनके प्रतिरोध का ही परिणाम था कि औरंगजेब के मरते ही मुगलवंश का पतन हो गया। इतिहास साक्षी रहा है कि जब जब आतता...
क्षत्रिय की पहचान क्षत्राणी
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आदिकाल से हमारे ऋषियों और पुरखों ने सनातन धर्म,संस्कृति,रहन सहन,खान पान तथा पहनावे पर गहन शोध करके नीति नियम निर्धारित किये।जो धीरे-धीरे हमारी सास्कृतिक पहचान बन चुकी थी । जैसे कि---पुरूष सिर पर पगड़ी, साफा ,दाढ़ी मूंछ,धोती-कुर्ता पहनते थे ।जो हर मौसम में शरीर की सुरक्षा करते हैं ।पहनावे जातिगत आधार पर भी अलग-अलग होते थे ।महिलाओं की पोशाक भी अलग-अलग होती थी ।जिससे अपरिचित भी समझ जाता था कि यह अमुक जाति से है। वर्तमान समय में हमने अपने जीवन से प्राचीन पहनावे को छोड़ दिया गया है ।जिससे अपरिचित व्यक्ति पहचान नहीं सकता है ।कहीं कहीं परंपरागत पहनावा दिखाई देता है । जिसको आदर और पहचान मिलती है । आज राजपूतों की पहचान क्षत्राणीयो से है ।क्षत्राणीयो ने अपना पहनावा यथावत रखा हुआ है । आज दुसरे समाज अपने धर्म व संस्कृति के अनुसार रह रहे हैं ।और अपनी पहचान बनाये हुए हैं ।उन पर न तो कोई सरकारी दबाव है ।न ही कोई अन्य जातिगत दबाव है । काश!हम भी अपने पारंपरिक पहनावे को बरकरार रखे।जिससे राजपूती संस्कृति बनी रहे और सब आदर व सम्मान की नज़र से देखें ।जिस तरह स...
मानसिंहजी आमेर के बारे में 10 रोचक तथ्य
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मानसिंहजी आमेर के बारे में 10 रोचक तथ्य 1 - मानसिंहःजी का रंग अन्य लोगो की तरह नही था, जहां अकबर बहुत ही गौरा था, वहीं मानसिंहजी का वर्ण नीले रंग का था, यह देखकर अकबर ने मानसिंहजी से पूछा, मानसिंह, जब खुदा नूर ( शक्ल सूरत, सुंदर रंग) बांट रहे थे, तब आप कहाँ थे ? मानसिंहःजी ने जवाब दिया - श्रीमान अकबर, मैं भी वहीं था जिस समय सभी लोग सुंदरता बटोर रहे थे, मैं उस समय ईश्वर से वीरता और पराक्रम मांग रहा था । 2 - हल्दीघाटी के मैदान में अगर मानसिंहजी नही जाते, तो शायद आज मेवाड़ का अस्तित्व ही नही होता, हल्दीघाटी युद्ध से मात्र 10 वर्ष पूर्व अकबर में चित्तौड़ पर आक्रमण किया था, उस समय महाराणा उदयसिंह अपने 26 वर्षीय पुत्र महाराणाप्रताप जी समेत सारे परिवार को लेकर सुरक्षित स्थान पर चले गए । उनके पीछे से लगभग 2 लाख हिंदुओ की हत्या हुई, 30,000 स्त्रियां बंदी बनकर हरम में गयी, किले में जो राजपूत थे, वह लगभग सारे मारे गए, स्त्रियों का जौहर हुआ । लेकिन मानसिंहजी के समय ऐसा कुछ नही हुआ । मानसिंहजी जब अकबर के सेनापति बनकर आये, तो एक भी मेवाड़ी जनता को लूटा, खसोटा नही गया । इस प्रकार मानसिंहजी न...