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Showing posts from May, 2018

राजपूताना स्टोरी

                    भुली और बिसरी, एक कहानी  जैसा क़िस्सा और इतिहास का हिस्सा.... कीरत रो धाड़ो कियो !! " दियां रा देवल़ चढै" री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है।राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै- दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो, प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।। इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी  कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ?पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है। कोटड़ियो बाघो कठै आसो डाभी आज। गवरीजै जस गीतड़ा गया भींतड़ा भाज।। कोई कितरो ई धनवान कै बल़वान होवो पण जितैतक उणरै मन में उदारता कै त्याग नीं है उतैतक बो किणी रै मन में आपरै प्रति अनुराग नीं जगा सकै।लोग तो उणांनै ईज याद करै जिकै धन नै  हाथ रो मैल मानता आया है- अत्थ जिकां दी आपणी, हरख गरीबां हत्थ। गवरीजै जस गीतड़ा , तांत तणक्कां सत्थ। या हेली थारै कंथ रै , मिटै न मंगणियार। जद जागूं जद सांभल़ू, तांत तणी तणकार!! ऐड़ै दातारां री उदारता नै अखी राखण सारू...

मैंने उसकोजब-जब देखा,लोहा देखा।लोहे जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा

                        मैंने उसकोजब-जब देखा,लोहा देखा।लोहे जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा। #यह_ही_है_क्षत्राणी          यथार्थ में देखा जाए तो क्षत्राणीयों का इतिहास व उनके क्रियाकलाप उतने प्रकाश में नहीं आए जितने क्षत्रियों के। क्षत्राणीयों के इतिहास पर विहंगम दृष्टि डालने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि क्षत्रिय का महान त्याग व तपस्या का इतिहास वास्तव में क्षत्राणीयों की देन है।       राजा हिमवान की पुत्री #गंगा ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् श्रीनारायण के चरणों में स्थान पाया और भागीरथ की तपस्या से वे इस सृष्टि का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई। उन्हीं की छोटी बहन #पार्वती ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् सदाशिव को पति के रूप में प्राप्त किया व दुष्टों का दलन करने वाले स्वामी कार्तिकेय और देवताओं में अग्रपूजा के अधिकारी गणेश जैसे पुत्रों की माता बनी। महाराजा गाधि की पुत्री व विश्वामित्र जी की बड़ी बहन #सरस्वती अपनी तपस्या के बल पर ही जलर...

हमारी_भूलें

  कार्य_व_मार्गदर्शन_की_अवास्तविक_मांग आज लोग कहते है – ” हम काम करना चाहते हैं, लेकिन हमको कोई काम देने वाला नहीं है । हम सामजिक व आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में मार्गदर्शन के लिए तड़प रहे है लेकिन हमको कोई मार्गदर्शन देने वाला नहीं है। ” यह दोनों की मांगे पूरी तरह से असत्य व अपने आप को धोके में डालने वाली है। जो कार्य करना चाहता है , उसको काम करने से संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती और जो मार्ग को खोजना चाहता है , उसे मार्ग को प्राप्त करने से कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। काम की मांग करना अपनी निष्क्रिय पे पर्दा डाल कर अपने आप को भ्रमित करना है । लोग कहते है कि हम श्री क्षत्रिय युवक संघ में काम करना चाहते है । हम काम तब करें , जब हमको कोई अधिकृत व्यक्ति काम करने के लिए कहे । अगर हम वास्तविकता में जाएँ तो यह कथन कतई सही नहीं है , क्योंकि इस कथन के साथ भी दुराग्रह जुड़े हुए है । क्षत्रिय युवक संघ कोनसा है ? इसकी परिभाषा भी हम करें। उस प्रकार से हो तो हमें स्वीकार है अन्यथा नहीं । काम क्या हो व कैसा हो ? यह भी हम कहें जैसे तो तो ठीक है है अन्यथा गलत। फिर काम व मार्गदर्शन कि मांग ...

कच्छावाहा राजवंश

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                       कच्छावाहा राजवंश                         राजपूत-कच्छवाहा-सूर्यवंश-कुम्भावत शाखा। आमेर के राजा चन्द्रसेन बनबीरोत के पुत्र कुम्भा अपने समय के ख्याति प्राप्त वीर योद्धा एवं पराक्रमी थे। हिन्दाल पठान के द्रारा रायमल जी अमरसर पर वि.स.1555 मै कुम्भा जी ने अत्यत विरता दिखाते हुऐ। विरगति को प्राप्त हुऐ। इन्हि के वंशज कुम्भावत कहे लाऐ। कुम्भा जी के पुत्र उदयकर्ण को महार की जागीरी मिली।  इनके वंशज लुर्णकर्ण जी भी तजस्वी व प्रतापी थें। उनको रावत की विषश पदवी दी गई। इस कारण लुर्णकर्ण जी के रावत भी कहलाऐ।  लुर्णकर्ण जी के चार  पुत्र रामजी कर्मसिह जी(3व4के नाम ज्ञात नहीं) बडे पोत्र राम जी महार रहे छोटे कर्मसिह जी पाड़ली ठीकाना मिला। बाद मै छुट गया। ओर उनके वंशजो को दातंली ठिकाना मिला।(मेहन्दीपुर के बालाजी के नजदीक ) दौसा  तीसरे पोत्र के वंशज झुन्झुनू जिला मे बाजवा,हरिडिया,लामा ढाडी, टिलोडी मे आज भी निवास.करते है।  ये राव...

रत्नावत कछ्वाहा

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                         रत्नावत कछ्वाहा राजपूत +-सूर्य वंश-शाखा -रत्नावत कछ्वाहा। रत्नावत - दासासिहं (दासाजी) के पुत्र रतनसिहं के वंशज रत्नावत कहलाऐ। दासाजी,नरूजी क पुत्र थे, हां हुक्म वही नरूजी जिन्है से नरूका वंश चले रहा है।  हम यू भी कहै सकते है।की रत्नावत नरूका कछवाहा की उप शाखा है। प्राचिन अलवर राज्य(  वर्तमान मै राजस्थान का जिला है।) मे रत्नावतो के पांच मुख्य ठिकाने थे। 1.मेहरू - वर्तमान भारत के राजस्थान के टोक जिले में है। 2. निमेडा़-वर्तमान भारत के राजस्थान में जयपुर जिले के फागीं तहसील में है। 3.खेर-वर्तमान भारत में राजस्थान के अलवर जिले में है। 4.तिराजू-वर्तमान भारत के राजस्थान के टोक जिले में है। 5.केरवालिया-वर्तमान में भारत राजस्थान के बाराँ जिले मे है। रत्नावत कछवाहा नरूका कछवाहा की ही उपशाखा है। महाराज मेहराज जी,   (मिराजजी) के वंशज नरूजी के वशंज नरूका कहलाऐ।मेराज जी बरसिहं जी के पुत्र ओर उदयक्रण जी के पोते है। नरूजी के पोत्र दासासिहं (दासाजी) दासाजी के  पुत्र रतनज...

भूत

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            रणसी गांव की भूत बावड़ी का किस्सा चाम्पावत ठाकुर सा ने भूत को वश में कर बनवाई थी बावड़ी और महल जोधपुर से करीब 105 किलोमीटर दूर बोरूंदा थाना क्षेत्र में एक एेतिहासिक गांव है रणसी गांव... यहीं मौजूद है ये भूत बावड़ी। ये बावड़ी कलात्मकता का एक बेजोड़ नमूना है।जिसे खुद भूत ने बनाया था! जोधपुर दरबार के यहां रणसी गांव के ठाकुर जयसिंह चाम्पावत ठकुराई का काम देखते थे। एक दिन ठाकुर सा गणगौर मेले में जोधपुर के राजा के किसी काम के लिए जा रहे थे। रास्ते में चिडाणी गांव स्थित लत्याळी नाडी में वे अपने घोड़े को पानी पिलाने के लिए रुके। उस समय रात काफी हो चुकी थी। ठाकुर सा का घोड़ा जब पानी पी रहा था, तभी ठाकुर सा को वहां एक झाड़ी के पीछे कुछ हलचल महसूस हुई। गौर से देखने पर ठाकुर सा को वह कोई भूतहा आकृति मालूम हुई। ठाकुर सा के बड़ी निर्भीकता से बोलने पर भूत उनके सामने प्रकट हुआ और बोला कि मैं एक शाप से बंधा हूं और इस नाडी का पानी नहीं पी सकता, आप मुझे पानी पिला दीजिए। पानी पीने के बाद उस भूत ने ठाकुर जयसिंह से कुछ खाने की सामग्री भी मांगी, जिसे लेने के बाद...

कछवाहा वंश इतिहास

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           कछवाहों_मे_मांसाहार_और_मदिरापान_निषेध_है. #आइए_जानते_है_किस_तरह_से_कछवाहों_को_ #मांसाहार_और_मदिरापान_की_वजह_से_अपना_पैतृक_राज्य_ग्वालियर_त्यागना_पडा क्षत्रियों में अपनी कुलदेवी के लिए बलि देने व शराब चढाने की परम्परा कब शुरू हुई यह शोध का विषय है| लेकिन क्षत्रिय चिंतकों व विद्वानों के अनुसार क्षत्रियों में पशु बलि व मदिरा चढाने की पूर्व में कोई परम्परा नहीं थी और क्षत्रिय मांसाहार व मदिरा से दूर रहते थे, लेकिन क्षत्रियों के शत्रुओं ने उन्हें पथ भ्रष्ट करने के लिए उन्हें इन व्यसनों की ओर धकेला| इस कार्य में क्षत्रियों के ऐसे शत्रुओं ने योगदान दिया, जिन्हें क्षत्रिय अपना शत्रु नहीं, शुभचिंतक मानते थे| लेकिन ऐसे लोग मन ही मन क्षत्रियों से जलते थे और क्षत्रियों का सर्वांगीण पतन करने के लिए पथ भ्रष्ट करना चाहते थे| ऐसे ही इन कथित बुद्धिजीवी शत्रुओं ने क्षत्रियों को पथभ्रष्ट करने के लिए उनसे अपने देवी-देवताओं के लिए पशु-बलि व मदिरा चढाने का कृत्य शुरू करवाया और यह परम्परा शुरू होने के बाद क्षत्रिय मांसाहार व शराब से व्यसनों में पड़ कर पतन के...

क्रांतिवीर: बलजी-भुरजी शेखावत

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                 क्रांतिवीर: बलजी-भुरजी शेखावत    राजस्थान राज्य की जागीर बठोठ-पटोदा के ठाकुर बलजी शेखावत दिनभर अपनी जागीर के कार्य निपटाते,लगान की वसूली करते,लोगों के झगड़े निपटाकर न्याय करते,किसी गरीब की जरुरत के हिसाब से आर्थिक सहायता करते हुए अपने बठोठ के किले में शान से रहते ,पर रात को सोते हुए उन्हें नींद नहीं आती,बिस्तर पर पड़े पड़े वे फिरंगियों के बारे में सोचते कि कैसे वे व्यापार करने के बहाने यहाँ आये और पुरे देश को उन्होंने गुलाम बना डाला | ज्यादा दुःख तो उन्हें इस बात का होता कि जिन गरीब किसानों से वे लगान की रकम वसूल कर सीकर के राजा को भेजते है उसका थोड़ा हिस्सा अंग्रेजों के खजाने में भी जाता | रह रह कर उन्हें फिरंगियों पर गुस्सा आता और साथ में उन राजाओं पर भी जिन्होंने अंग्रेजों की दासता स्वीकार करली थी | पर वे अपना दुःख किसे सुनाये,अकेले अंग्रेजों का मुकाबला भी कैसे करें सभी राजा तो अंग्रेजों की गोद में जा बैठे थे | उन्हें अपने पूर्वज डूंगरसीं व जवाहरसीं की याद भी आती जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ा...

राजावत ठिकाना भैसावा इतिहास

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  पूरणमललोत राजावत ठिकाना भैसावा                         भाग 1 ख्यात अनुसार राजावत कछवाहोँ का पीढी क्रम ईस प्रकार है – 01 - भगवान श्री राम -  भगवान श्री राम के बाद कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत राजवंश का इतिहास इस प्रकार भगवान श्री राम का जन्म ब्रह्माजी की 67वीँ पिढी मेँ और ब्रह्माजी की 68वीँ पिढी मेँ लव व कुश का जन्म हुआ।  भगवान श्री राम के दो पुत्र थे –         01 - लव        02 - कुश रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी की महान धरा एवं माता सीता के पुत्र लव-कुश का जन्म स्थल कहे जाने वाला धार्मिक स्थल तुरतुरिया है। - लव और कुश राम तथा सीता के जुड़वां बेटे थे। जब राम ने वानप्रस्थ लेने का निश्चय कर भरत का राज्याभिषेक करना चाहा तो भरत नहीं माने। अत: दक्षिण कोसल प्रदेश (छत्तीसगढ़) में कुश और उत्तर कोसल में लव का अभिषेक किया गया। राम के काल में भी कोशल राज्य उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में विभाजित था। कालिदास के रघुवंश अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का औ...

निपाह वायरस

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    निपाह वायरस के मरीज का इलाज करने वाली नर्स की मौत, पति के लिए छोड़ा इमोशनल मैसेज नई दिल्ली : "मैं बस जा ही रही हूं... मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी... माफ कीजिएगा... हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा..." अपने पति के लिए यह गुडबाय नोट लिखा था नर्स लिनी पुथुस्सेरी ने, जो नए निपाह वायरस का चौथा शिकार बनीं. उनका दाह संस्कार भी आनन-फानन में कर दिया गया, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके, और इसी कारण वह अपने परिवार को देख भी नहीं पाई. 31-वर्षीय लिनी की दो संतानें हैं - सात साल और दो साल की. अपने पति को लिखे एक बेहद भावुक नोट में नर्स लिनी ने लिखा, "साजी चेट्टा, मैं बस जा ही रही हूं... मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी... माफ कीजिएगा... हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा... हमारा मासूम बच्चा, उसे खाड़ी देशों में ले जाइएगा... उन्हें उस तरह अकेला नहीं रहना चाहिए, जिस तरह हमारे पिता रहे... बहुत-सा प्यार..." लिनी का यह नोट सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है, और पढ़ने वालों की आंखों को नम कर रहा है.माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर बहुत-से लोगों ने युवा नर...

सामन्त क्या होते थे इस लेख से पता चल जाएगा

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बिना ठाकुर(सामन्त/जागीरदार) के किसी भी गाँव की कल्पना ही नही की जा सकती थी। हर गाँव की रक्षा हेतु किसी राजपूत को ठाकुर का पद दे दिया जाता था न कि सिर्फ लगान वसूलने के लिए इसी बात पर एक किस्सा पेश कर रहा हूँ । अंग्रेजो ने दिल्ली के अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को बन्दी बना लिया और मुगलो का जम कर कत्लेआम किया । सल्तनत खत्म होने से मुगल सेना कई टुकड़ो में बिखर गयी और देश के कई हिस्सों में जान बचा कर छुप गयी । पेट भरने के लिए कोई रोजगार उन्हें आता नही था क्योंकि मुगल सदैव चोरी लूटपाट और बलात्कार जेसे गन्दे और घ्रणित कार्यो में ही व्यस्त रहे इसलिए वो छोटे गिरोह बना कर लूटपाट करने लगे । बीकानेर रियासत में न्याय प्रिय राजा गंगा सिंह जी का शासन था जिन्होंने गंग नहर(सबसे बड़ी नहर) का निर्माण करवाया जिसको कांग्रेस सरकार ने इन्दिरा गांधी नहर नाम देकर हड़प लिया बनवाई थी । उन्ही की रियासत के गाँव आसलसर के जागीरदार श्री दीप सिंह जी शेखावत की वीरता और गौ और धर्म रक्षा के चर्चे सब और होते थे । "तीज" का त्यौहार चल रहा था और गाँव की सब महिलाये और बच्चियां गांव से 2 किलोमीट...

Bhanwar Singh Rajawat Basdi kala

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राजपूत कछवाहा वंश 3

               राजपूत इतिहास  कछवाहा वंश 3 जय कुलदेवी जमुवाय भवानी। धर्मरक्षक राजा मानसिहं आमेर जिनकी चर्चा  दूर दूर तक थी। बल बुध्दि चातुर्य धर्मरक्षक राजामानसिहं, उनके विजय अभियान अफगान, फारस ,मंगोल ,इत्यादि यवन राज्य व श्रीलंका तक थे। उनका भय यवनों में इतना था । इतना कहर भरपाया की आज भी उनके नाम का भय जारी है। वो कोई ओर नही राजा मानसिहं आमेर थे। पर कुछ धर्म विरोधीयों ने इनका वर्तमान में इनका इतिहास इतना धूमिल कर दिया है। जिसकी कोई सिमा नही आज उनके सामने सत्य प्रमाणिक आधार पर साबित करतें है। पर इन झुठों से इस देश से धर्म रक्षकों का सत्य कोई नही छिन सकता हैं। वो सत्य थे।सत्य ही रहेगें।।                       भारमल जी की शादी -पृथ्वीराज सिहं (प्रिथीराज) के पुत्र भारमल जी ने बहुत सी शादीयां की थी। राजपुत वंश की दो ही शादीयां  की है। अतं पत्नी का पूर्णतया दर्जा दो ही रानियो को प्राप्त है। बाकि अन्य जातियों की थी ।जो केवल रखलें या दासियां थी। जिन्हे के कारण उन्हे दो र...

राजपूत इतिहास कछुआ वंश 1

            राजपुताना इतिहास – कछवाहा (कछवाह) 1 क्षत्रिय  वंश का इतिहास कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का क्रमबद्द इतिहास लिखने से पहले मैं माँ भवानी के चरणों मेँ नमन करता हूँ। कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का इतिहास लिखने के साथ-साथ मै आपको नरवर व उससे भी पहले के इतिहास के बारे में भी में विस्तार से बताने का प्रयास करूँगा। नरवर से इस कछवाहा (कछवाह) वंश के वट वृक्ष कि शाखाएँ प्रफुलित होकर सर्वत्र फैली है। जो कछवाहा (कछवाह) वंश का इतिहास समझने से पहले बहुत जरुरी है। क्योँकि आज कल कुछ अवसरवादी व हल्कि सोच के गैर राजपूत लोग दूसरो का इतिहास चुराकर तोड़मरोड़कर पेश कर रहे हैं। वे लोग उसमे अपने वंशजो के नाम जोङकर राजपूत वंश के हमारे पूर्वजो को अपने पूर्वज बताकर अपनी जाती या खाँप को उच्च एँव महान साबित करने की सोची समझी चाल के तहत हमारा इतिहास मिटाने कि कोशिस कर रहे हैं। मगर सच तो यह हैकि आज हमारी युवा पीढ़ी जो अक्सर अपना और अपनें पूर्वज वंसजों का जातिगत इतिहास केवल बाज़ारू किताबों और इन्टरनेट पर दी गयी जानकारी की सहायता से कुछ ही जानकारियां ढ...